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Tuesday, 21 February 2017

मोदी ने खोल दिया ‘तोप का मुंह’


एक तरफ कानपुर और लखनऊ सहित 69 सीटों पर रविवार को तीसरे चरण का मतदान हो रहा था तो दूसरी तरफ पीएम नरेंद्र मोदी फतेहपुर में रैली कर रहे थे। उनके निशाने पर सीधे तौर पर राहुल और अखिलेश तो रहे ही साथ ही साथ उन्होंने यहां बीजेपी का परंपरागत दाव हिंदुत्व का कार्ड भी खेल दिया। गांवों में श्मशान और कब्रिस्तान की बात कहकर मोदी ने धर्म विशेष का अपना पुराना अजेंडा साफ कर दिया हैं।
वहीं अब इस बयान को लेकर कांग्रेस चुनाव आयोग से शिकायत कर सकती है। कांग्रेस पार्टी की दलील है कि पीएम ने धार्मिक भावनाओं को चुनावी मुद्दों की शक्ल देना चुनाव आदर्श आचार संहिता का खुला उल्लंघन है।
दरअसल बीजेपी को लगता है कि मोदी फैक्टर काम कर रहा है। इस कारण मोदी ने बीजेपी के परंपरागत धर्म विशेष के वोटर्स को अपने साथ जोड़ने का दांव खुलकर खेल दिया है। वह समाजवादी पार्टी के एमवाई समीकरण से इतर दलित, कुर्मी और ब्राह्मण वोटर्स के बीच पूरी संभावनाएं तलाश रही हैं। इसकी एक और वजह पूर्वांचल और बुंदेलखंड में काफी सीटों पर यादव जाति का प्रभावी होना है। यहां चुनाव चौथे चरण में होगा। पूर्वांचल में एमवाई वोटर्स साथ आ जाए तो इनका वोट शेयर करीब 30 फीसदी होता है। ऐसे में फतेहपुर से दिया गया यह मेसेज दूर तलक जाएगा।
बहरहाल यूपी चुनाव अभी जारी है और मोदी के इस बयान का बीजेपी को कितना फायदा पहुंचने वाला है ये तो 11 मार्च को ही पता चलेगा लेकिन फलहाल मोदी ने तोप का मुंह’ खोल दिया हैं।

Sunday, 12 February 2017

बाहुबली नहीं इस बार ‘बहू बली’ का दौर है जनाब


उत्तर प्रदेश में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। सभी पार्टियां कमर कस कर तैयार हो चुकी हैं। हर बार के तरह इस बार भी चुनाव में बाहुबलियों का बोलबाला है। किसी ने बाहुबलियों का टिकट काटा तो किसी ने टिकट बांटा। ये इसलिए क्योंकि ये उस पार्टी के नजरिए से फायदेमंद साबित हो सकता है। कुल मिलाकर सभी पार्टियां खुद को पाक साफ तो कहती है लेकिन होता कुछ और ही है। खैर इस बार के चुनाव में खास बात ये है कि बाहुबलियों के साथ बहुओं का भी पूरा जोर है। देश के सबसे बड़े राजनीतिक घराने में से एक यादव परिवार की बड़ी यानी अखिलेश यादव की पत्नी पिछले कुछ सालों में काफी लाइमलाइट में रही हैं लेकिन इस चुनाव में छोटी बहू अपर्णा यादव की भी धमाकेदार एंट्री हो गई और वो लखनऊ कैंट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं।
यूपी में अब तक समाजवादी पार्टी की दो बहुएं ही सुर्खियों में थीं। लेकिन इस बार एक और बहू ने राजनीति में ऐसी एंट्री मारी कि विरोधियों की नींद उड़ा डाली। जिस बहू की हम बात कर रहे हैं वो यूपी के एक राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखती है, इस बहू के साथ समर्थकों की भारी भीड़ देखकर बड़े-बड़े सियासी दलों के होश उड़ गए। चेहरे पर सादगी और हल्की मुस्कुराहट लिए इस बहू की एक झलक देखने के लिए लोगों का हुजूम टूट पड़ता है। हम बात कर रहे हैं चौधरी अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी की पत्नी चारू सिंह की। चुनाव प्रचार में उतरी इस बहू के जोशोखरोश ने पार्टी के बेजान कार्यकर्ताओं में जान फूंक दी है। सपा, बसपा हो या भाजपा के नेता शहरों में रोड शो निकाल रहे हैं तो यह बहू गांव में रोड शो निकाल रहीं हैं। सीधे घरों में घुसकर रसोई तक पहुंच जाती हैं तो घरों की महिलाओं से यह बहू आत्मीय संबंध भी स्थापित कर लेती है। यह देख विरोधी दलों के प्रत्याशियों का परेशान होना लाजिमी है।


अब बहूओं का यही ट्रेंड बसपा भी फॉलो करने जा रही है। जौनपुर की मड़ियांव सीट से पूर्व सांसद सावित्री पटेल की बहू सुषमा को उतरा हैं। वैसे तो सुषमा की प्लानिंग हसबैंड की तरह IAS अफसर बनने की थी, लेकिन सास के एक ऑर्डर पर उन्होंने अपनी राह बदल ली। सुषमा ने शुरुआत से ससुराल में राजनैतिक माहौल देखा है। ससुर दूध नाथ पटेल 1985 में मड़ियांव से विधायक रहे। दूध नाथ के बाद उनकी पत्नी सावित्री पॉलिटिक्स में उतरीं। 1989 से 1996 तक सावित्री पटेल लगातार मड़ियांव से विधायिका रहीं। 2012 में भी सावित्री की पॉलिटिक्स में वापसी करते हुए चुनाव लड़ा। इतने लंबे पॉलिटिकल करियर के बावजूद सावित्री पटेल की संपत्ति कुल 43 लाख रुपए की है। वो टाटा सफारी से चलती हैं और सेफ्टी के लिए रिवॉल्वर-गन तक रखती हैं।