Follow by Email

Followers

Saturday, 14 October 2017

पीएम मोदी के गुजरात में यूपी के सीएम योगी के होने के मायने


बीजेपी के पोस्टर बॉय यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ गुजरात दौरे पर हैं। गुजरात गौरव दौरे के दौरान योगी स्टार प्रचारक के रुप में दिखेंगे। अपने दो दिनों के दौरे पर योगी गुजरात के वलसाड, सूरत, कच्छ और भुज में 25 से 30 जनसभाएं करेंगे। जिसके जरिए वो हिंदू वोटरों को लूभाने की कोशिश करेंगे। वैसे तो मोदी और अमित शाह का गृह राज्य होने के कारण ये दोनों गुजरात में प्रचार के लिए काफी हैं। लेकिन इस बार बीजेपी को योगी को प्रचार में उतारना पर रहा है तो इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि करीब 22 साल बाद बीजेपी को पहली बार गुजरात में कड़ी चुनौती मिल रही है। एक तो पार्टी को इस बार सीएम उम्मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी जैसा कोई दमदार चेहरा नहीं है। दूसरा पाटीदार आंदोलन और दलित उत्पीड़न के मुद्दे पर पार्टी बचाव के मुद्रा में है। वहीं जीएसटी के बाद छोटे कारोबारी भी परेशान हैं और कांग्रेस को इस बात का अंदाजा है। यही वजह है कि उसने भी पूरी ताकत छोक दी है। राहुल गांधी खुद इस महीने दो बार गुजरात का दौरा कर चुके है। गुजरात में करीब 89 फीसदी हिन्दू वोटर है। बड़े पैमाने पर पूर्वांचली और उत्तर भारतीयों की आबादी है। ऐसे में बीजेपी को उम्मीद है कि योगी के दौरे से उसके पक्ष में माहौल बनेगा।

दरअसल पीएम मोदी के गृह राज्य होने के साथ-साथ गुजरात एकलौता राज्य है जहां बीजेपी करीब 22 सालों से लगातार शासन कर रही है। अगर यहा उसका प्रदर्शन खराब रहा है तो उसका असर पूरे देश में पड़ सकता है। यही वजह है कि बीजेपी किसी तरह का जोखीम लेने के मूड में नहीं है और जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

स्टार्टअप इंडिया: बदनाम पान पैलेस

अगर आप कभी बिहार पहुंचे और बिहार में मधुबनी जिला तो मधुबनी से 8 किलोमीटर की दुरी पर एक गांव बलिया है यहां के दुर्गा भवन के प्रांगण में एक 'बदनाम पान पैलेस' है वहां जरूर पहुंचे। यकीन मानिए आप यहां के पान खा के बनारसी पान भुल जाएंगे। साथ ही आप 'द कपिल शर्मा शो' भी देखना भुल जाएंगे क्योंकि यहां आपको पान के साथ-साथ कॉमेडी का भी भरपूर डोज मिलेगा। यही नहीं यहां आपको जिंदगी के कई बेहतरीन सलाह भी मिलेंगे जैसे तंबाकू सेहत के लिए हानिकारक है, गुटखा से कैसे पान बेहतर है। ऐसे कई सलाह आपको मिलेंगे।

हां लेकिन आप यहां तभी आए जब आपके पास एक पान खाने के लिए आधे-एक घंटे का समय हो। क्योंकि यहां एक पान लगाने में कम से कम आधे घंटे का समय लगता है लेकिन इस दौरान आप बोर नहीं होंगे। वैसे तो मैं पान नहीं खाता पर हर रोज अगर एक बार बदनाम पान पैलेस नहीं पहुंचा तो दिन पूरा नहीं होता और करीब यही हाल इस गांव के हर युवा का है। 'पंकज संन्यासी' उर्फ 'मास्टरमाइंड' का यह पान का दुकान बहुत पुराना तो नहीं है लेकिन आस-पास के गांव में मशहूर जरूर है और ये शायद दुनिया का इकलौता दुकान मिलेगा जिसमें आपको कोई दरवाजा नहीं मिलेगा। 'मास्टरमाइंड' का सपना है कि वो ऑनलाइन पान बेचे और इस पान को पूरे भारत में मशहूर करें। ताकि लोग कह सके खई के पान बलिया वाला
खैर अगर ये ऐसा कर पाए तो पीएम मोदी के 'स्टार्टअप इंडिया' का अच्छा उदाहरण होगा। 'मास्टरमाइंड' को उनके भविष्य और सपनों के लिए शुभकामनाएं!

Saturday, 3 June 2017

नीतीश जी ये नैंसी झा की नहीं सुशासन की हत्या है




बिहार के मधुबनी जिले में एक 12 साल की लड़की की निर्मम तरीके से की गई हत्या ने देश को हिला कर रख दिया है, ठीक वैसे ही जैसे सालों पहले निर्भया हत्याकांड ने लोगों को झकझोर कर रख दिया था। निर्भया कांड के बाद इंसाफ की आवाज उठाने के लिए लोग खुद घरों से निकल आएं थे। अपनी आवाज का हथियार लेकर... देश में हर तरफ सड़क से लेकर संसद तक बस एक ही आवाज थी। बदलना होगा, सामज को बदलना होगा, कानून को बदलना होगा, सोच को बदलना होगा। हर बेटी की आवाज थी, हर बहन का दर्द था, हर माँ की टीस थी और हर टीस में मिल रही थी उस जमात की आवाजें जो औरतों की आजाद सांसों की हिमायती थी। देखते ही देखते एक आंदोलन खड़ा हो गया। हर किसी के मन में बस एक ही बात चल रही थी ऐसी दरिंदगी के खिलाफ समाज को जागना होगा। इस हैवानियत से समाज को निकालना होगा। ऐसा दोबारा हो, उसका इंतजाम करना होगा। इस घटना के बाद एक उम्मीद जगी की शायद अब कुछ बदल जाए। शायद अब किसी चलती बस में... ऑटो में... घर में... या राह पर कोई और निर्भया रौंदी जाए। लेकिन हुआ क्या... कुछ भी तो नहीं बदला... सच्चाई यहीं है की निर्भया कांड के पहले भी ऐसे मामले होते रहे और उसके बाद भी हो रहे हैं और इसका जीता जागता उदाहरण है नैंसी झा हत्याकांड। आखिर क्या गलती थी उस मासूम की।
दरअसल 25 मई को लापता नैंसी झा की लाश 28 मई को सुबह उसी गांव के नदी के किनारे एक खेत में मिलती है। नाबालिग लड़की की लाश जिस स्थिति में बरामद हुई वह वाकई ही सभ्य समाज में रहने वाले लोगों के लिए रोंगटे खड़े करने वाला है। लड़की के शरीर पर तेजाब डाले गए थे। लड़की के दोनों हाथों के नसें काट दी गई थी। लड़की की गला को भी बड़ी निर्ममता से रेत दिया गया था। सोशल मीडिया पर इस बच्ची की तस्वीर देखकर रीढ़ की हड्डी में सिहरन होती है। लगता है कलेजे के बीचोंबीच किसी नरभक्षी ने अपने दांत गड़ा दिया हो। ताजुब तब और होती है जब ये पता चलता है कि नैंसी झा को पुलिस चाहती तो बचा सकती थी। क्योंकि जिस दिन नैंसी का अपहरण हुआ था उसी दिन नैंसी के पिता ने एफआईआर दर्ज करवाई थी मगर पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया। यही नहीं इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद भी नीतीश बाबू चुप चाप है। किसी नेता ने वहां जाना भी जरूरी नहीं समझा और ही इसपर आवाज उठाना जरूरी नहीं समझा पक्ष ही विपक्ष ने।
बहरहाल नैंसी की हत्या ने एक बार फिर से बिहार में गिरते नून व्यवस्था का पोल खोल दिया है। बिहार पुलिस पिछले एक-दो सालों से अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने में नाकाम साबित हो रही है। बिहार के मुख्यमंत्री एक तरफ तो लड़कियों के बारे में सरेआम अपनी चिंता जाहिर करते हैं। बिहार में दहेज प्रथा को लेकर नए आंदोलन की बात करते हैं लेकिन वहीं दूसरी तरफ उनकी पुलिस तीन दिन तक एक नाबालिग का मरने का इंतजार करती है।

दरअसल बिहार में पिछले कुछ सालों से युवतियों के साथ रेप और अपहरण की घटना आम हो गई है। सूबे में कानून व्यवस्था पिछले कुछ सालों से बिल्कुल चरमरा सी गई है। रंगदारी, लूट, मर्डर जैसे शब्दो की दहशत बिहारवासियों पर एक बार फिर से छाने लगी है। ऐसे में बिहार में बढ़ रही आपराधिक घटनाओं और सरकार की विफलता पूरे बिहार में धीरे-धीरे उग्र रूप धारण करती जा रही है। इसलिए अब समय गया है कि सीएम नीतीश इसपर जल्द ही कुछ करें और अपने सुशासन को एक बार फिर सावित करें जिसके लिए वो जाने जाते हैं नहीं तो ऐसा हो कि बहुत देर हो जाए।