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Wednesday, 14 December 2016

यूपी का कोई सीएम क्यों नहीं जाना चाहता नोएडा


उत्तर प्रदेश में जो भी मुख्यमंत्री बनता है उसके मन में हमेशा एक डर रहता है कि नोएडा का दौरा करने से कुर्सी छिन सकती है। या यूं कहें कि नोएडा का जिक्र होते ही सत्ताधारियों को कुर्सी छिनने के डर सताने लगता है। फिर चाहे वे मुलायम सिंह यादव हों, या मायावती या फिर कोई और, सभी को नोएडा से डर लगता रहा है। शायद इसीलिए यूपी के वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी नोएडा न जाने का फैसला लिया है। एक बार फिर सीएम अखिलेश यादव अपने ही प्रदेश के शो विंडो कहे जाने वाले नोएडा में आने से डर गए। दरअसल पहले कहा जा रहा था कि सीएम अखिलेश यादव नोएडा पहुंचकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा की कई योजनाओं का लोकार्पण करेंगे, लेकिन इस शहर में आते ही सीएम की कुर्सी जाने के टोटके के डर से सीएम ने आने से मना कर दिया और वे बुधवार को लखनऊ से ही इन योजनाओं का लोकार्पण किया।
दरअसल पिछले कुछ साल के रिकॉर्ड ऐसे हैं कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा का दौरा करता है। उसके कुछ ही दिनों में उनकी सरकार चली गर्इ। यहीं कारण है कि हर मुख्‍यमंत्री नोएडा आने से बचते रहे हैं। जिसने भी यह हिम्‍मत की वह अगली बार सीएम नहीं बना। अखिलेश यादव भी ये रिकॉर्ड देखते हुए हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं। वो ऐसी कोई गलती नहीं करना चाहते हैं, जो उन्हें सीएम की कुर्सी से दूर ले जाए। वह बिना नोएडा आए ही यहां की योजनाओं का लोकार्पण लखनऊ से ही कर देते हैं। 30 नवंबर को भी उन्होंने बाबा रामदेव के फूड पार्क का शिलान्यास लखनऊ से ही किया। इससे पहले उन्होंने यमुना एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन लखनऊ से ही किया था। यहीं नहीं, जब प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति नोएडा में आए तो उनकी अगवानी करने के लिए भी अखिलेश यादव ने नोएडा का रुख नहीं किया था।
किस-किस ने गंवाई सत्ता
पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह ने नोएडा का दौरा किया और कुछ ही दिन बाद उनके हाथों से सत्ता फिसल गई। 1989 में नारायण दत्त तिवारी के साथ भी कुछ इसी तरह हुआ। 1989 में वे नोएडा के विकास कार्यों का जायजा लेने गये थे, उसी के बाद उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी खोनी पड़ी। वहीं1999 में कल्याण सिंह ने वेस्टर्न यूपी में चुनावी सभाओं के दौरान नोएडा में भी जमकर चुनाव प्रचार किया और 12 नवंबर 1999 में मायावती ने उनकी कुर्सी छीन ली।
फिर 1997 में मायावती ने नोएडा का दौरा किया,जिसके बाद सत्ता ने उनकी ओर से कुछ वक्त के लिए मुंह मोड़ लिया। इसके बाद से तो लोगों में नोएडा को लेकर अंधविश्वास फैल गया। बसपा की पिछली सरकार में मुखिया रहीं मायावती इस अंधविश्वास को मिटाने की कोशिश करने के लिए साल 2011 में फिर से नोएडा गईं लेकिन इस बार भी विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।