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Tuesday, 17 May 2016

माल्या हम शर्मिंदा हैं, किंगफिशर नहीं मिरिंडा है!

बिहार में शराबबंदी के बाद पहली बार घर आया... बिहार के मधुबनी जिला के एक छोटे से गांव बलिया (जहां मेरा घर है) शराब के एक पूर्व बिना लाइसेंस के सबसे बड़े कारोबारीछटंकी बीयर बार है... यहां पर कभी बीयर और शराब पानी की तरह बिकते थे, वैसे तो कहने को ये राशन की दुकान है पर दूसरी चीजों की तरह यहां शराब भी बिकती थी... लेकिन अब बिहार में शराबबंदी के बाद यहां मानो एक खामोशी सी छाई है... हर बीयर और शराब के ग्राहकों को उम्मीद थी की छटंकी भाई कहीं ना कहीं से तो जुगाड़ कर ही लेंगे, भले 100 के बदले 200 लगे... आखिर यहां शराब के मामले में जुगाड़ का दूसरा नाम छटंकी ही था... यानी आपको अगर कहीं दारू ना मिले तो छटंकी बीयर बार चले आइए यहां से आप कभी निरास हो के नहीं जा सकते... दूर-दूर के कई गांवों से दारू के मरीज यहां आया करते थे... मरीज इसलिए क्योंकि छटंकी मेरा बच्चपन का दोस्त भी है और मैं जब भी घर जाता हूं तो मेरा उठना बैठना हमेशा यहां होता है... और मैं जब इस दुकान पर होता हूं और कोई दारू का ग्राहक आता तो मैं उससे यही कहता लो आ गया तुम्हारा मरीज... और हर मरीज का इलाज यहां अच्छे से होता... लेकिन अब ऐसा नहीं है, अबजुगाड़ु छटंकी के पास भी कोई जुगाड़ नहीं है।
मैंने पूछा भाई अब तुम्हारे ग्राहक मैनेज कैसे करते हैं...? सब अचानक से संत बन गए क्या...और तुम्हारा मन कैसे लगता होगा दारू बेचे बिना...? आखिर तुम भी तो कभी-कभी ग्राहकों के साथ इसका लुफ्त उठा ही लेते थे... उसने कहा, भाई अब किंगफिशर नहीं, मिरिंडा से ही काम चलाना पड़ता है... अब वहीं बेचता भी हूं और ग्राहकों के साथ उसी का लुफ्त भी उठाता... और लोगों का क्या जब दारू ना मिले तो ना चाहते हुए भी संत बनना पड़ता है... वैसे सब पुराने जमाने में एक बार फिर लौट आए है... मैंने पूछा वो कैसे...? तो उसने कहा, वहीं अपना बुदरामाइसिन’ अब एक बार फिर बुदुर जी का जमाना लौट आया है दोस्त! अब उनके यहां ग्राहकों की फिर से लाइन लगने लगी है...  मैं खुद कभी-कभी उन्हीं का बूटी खा के काम चलाता हूं।
अब आप सोच रहे होंगे कि ये बुदरामाइसिन क्या है...? तो आपको बताते चले कि हमारे गांव में बुदुर जी नाम का एक शख्स हैं... जिसका किसी जमाने में भांग का बहुत बड़ा कारोबार हुआ करता था... उनके भांग के दुकान पर सुबह-शाम ग्राहकों की लाइन लगी रहती थी... और हमारे गांव समेत आस-पास के कई गावों में भांग क्रांति लाने में उनका बड़ा योगदान रहा है... उनके भांग को ही यहां बुदरामाइसिन के नाम से जाना जाता है... क्या बच्चे क्या बुढ़े हर कोई खा के मस्त रहते थे... लेकिन जमाना बदलने के साथ ही यहां के लोग भी बदल गए... और धीरे-धीरे बुदरामाइसिन का क्रेज यहां के युवाओं में खत्म होने लगा... फिर सब बीयर और शराब को अपनाने लगे... तब जा के छटंकी का दुकान छटंकी बीयर बार के नाम से जाना जाने लगा... तब बुदुर जी का धंधा बड़ा ही मंदा पर गया तो उनके बेटे जो अब तक पिता के बिजनेस में अपना हाथ बटाते थे उसने ऐसे में शहर का रुख करना ही उचित समझा... लेकिन अब जब बिहार में शराब बंद कर दिया गया है तो एक बार फिर लोगों को बुदुर जी याद आ गए... और उनके दुकान के आगे अब फिर से ग्राहकों की लाइन लगने लगी... हमारे बकवास ख़बर के संवाददाता ने जब बुदुर जी से बात की तो उनका कहना था कि भला हो नीतीश सरकार का... और कुछ करें... ना करें... पर हमारे लिए तो उसने बहुत कुछ किया... उनका कहना था कि जल्द ही वो अपने बेटों को बुला रहे है और अपने कारोबार का विस्तार करने जा रहे है... उन्होंने कहा कि यही मौका है बाबा रामदेव की तरह कारोबार की दुनिया में छा जाने का... हम जल्द ही पूरे बिहार में इसका प्रचार-प्रसार करेंगे... और कई ब्रांच भी खोलेंगे... अगले कुछ महीनों में एक बड़ा सा फैक्ट्री लगवा के नीतीश जी से उसका शुभारंभ करवाएंगे... इसके साथ ही हम बिहार में बहुत से युवाओं को नौकरी का अवसर भी देंगे... आगे उन्होंने कहा कि इसका हेड ऑफिस ठीक विधानसभा के सामने रखने का लक्ष्य है... जिससे विधायकों को दारू की कमी महसूस ना हो... यहां तक कि उन्होंने बातों-बातों में मुझे भी नौकरी का ऑफर दे दिया... उन्होंने कहा कि हमे इस सब के लिए एक मीडिया मैनेजर की तलाश है अगर आप करना चाहे तो आप के लिए दरवाजा खुला है।

नोटः- इस लेख को सिर्फ हलके-फुल्के माजाक के तौर पर ही ले।