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Thursday, 26 November 2015

इसे असहिष्णुता नहीं, असुरक्षा कहिए जनाब!


ये घटना नोएडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन की है... दिन के करीब 12 बजे जब में मेट्रो से उतरा तो स्टेशन के निचे देखा कुछ मनचले लड़के एक लड़की से जबरदस्ती कर रहे थे... पहली नजर में ये मामला मुझे छेड़छाड़ का लगा... मैने पत्रकारिता का धर्म निभाते हुए पहले कुछ तस्वीरें ले ली.... फिर इंसानियत का धर्म निभाते हुए निचे पहुंचा... और उस लड़कों  से  पूछा कि क्या हुआ, तो उसने कहा कुछ नहीं, जाइए आप अपना काम कीजिए....  मैने कहा मेरा यही काम है फिर मैने उस लड़की से पूछा तो वो बोली ये लोग जबरदस्ती अपने ऑटो में बैठने को कह रहा है... जहां जाने का चार्ज 80 रुपया है, ये कहता है मैं 50 में ही ले चलूँगा मैडम.... मैने मना कर दिया तो ये पीछा पड़ गया... बात सही है, अगर दिल्ली-एनसीआर में ऑटो वाले ज्यादा पैसों के बदले कम मांगे तो ये बात आपको हजम नहीं होगी... और फिर उसमें भी जबरदस्ती करें तब तो कुछ गरबर जरूर है... मैने जब ऑटो वाले से पूछा कि क्यू भाई ऐसा क्यों कर रहे हो तुम्हारी ऑटो कंपनी कोई ऑफर दे रही है क्या.... अब तो दिवाली, छठ भी बीत गई तो फिर ये ऑफर क्यों... उसने कहा नहीं सर सुबह से बोहनी नहीं हुआ तो सोचा 50 भी मिल जाए तो क्या बुरा है...  मैने कहा तो फिर ये ऑफर सभी के लिए होगा...  या ये सिर्फ लड़कियों के लिए है... तम्हारे इस ऑफर पर तो 50 लोग जाने को तैयार हो जाएंगे तो फिर जो नहीं जाना चाहता है उससे तुम जबरदस्ती क्यों कर रहे हो या फिर लगाऊ पुलिस को फ़ोन... फिर मैने चार कदम आगे ही वहां कुछ सिक्योरिटी गार्ड को देखा मैने उससे कहा आपलोग यहाँ सुरक्षा देने के लिए हो और आपके सामने जबरदस्ती हो रहा हैं और आप मुह घुमाए खड़े हो.... उसका जवाब आया कि मैने देखा नहीं... मैने कहा ये सब 15-20 मिनट से हो रहा है और आपलोगों ने देखा ही नहीं.... फिर उस लड़की ने कहा नहीं ये देख के चले गए कुछ नहीं कहा... मैने जब उससे पूछा ऐसा क्यों तो उसने कहा क्या करें साहब आप तो यहाँ आए है फिर चले जाएंगे पर मुझे तो यही रहना है इन्ही लोगों के बीच... यानि जो आपकी सुरक्षा के लिए है वही खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करता तो वो आपकी सुरक्षा क्या करेंगे? अखिलेश जी आपका भी परीक्षा नजदीक आ रहा है और इस परीक्षा में सुरक्षा ही सबसे बड़ा मुद्दा होगा! 

Monday, 2 November 2015

मोदी का सबसे छोटा फैन


ये दोनों ही घर में "छोटा आतंक" नाम से जाने जाते हैं....  एक मेरा भांजा और दूसरा भतीजा है तो शैतान होना ही चाहिए....  लेकिन शैतान होने के साथ ही ये दोनों जनाब मोदी जी के सबसे छोटे फैन हैं.... बड़ा इसलिए नहीं कहा कि ये लोग अभी खुद छोटे हैं तो छोटा फैन ही होंगे....  अब इसे मोदी जी के ब्रांडिंग का नतीजा कहे या फिर बचपन से ही राजनीति में रुचि....  इन दोनों का उम्र एक का मुश्किल से ढाई साल और दूसरे का साढ़े तीन साल होगा....  इस उम्र में शायद ही मुझे देश के प्रधानमंत्री का नाम पता हो पर इन दोनों को ना सिर्फ देश के पीएम का नाम पता हैं,  बल्कि उन्हें चेहरे से भी पहचानते  हैं....  कही भी पोस्टर दिख जाए तो ये  मोदी सरकार,  मोदी सरकार चिल्लाने लगते हैं..... आसमान में अगर हेलीकॉप्टर दिख जाए या फिर सड़क पर चुनाव प्रचार की कोई गाड़ी तो ये बाहर निकल के मोदी सरकार जिंदाबाद के नारे लगते....  मोदी को देखने की बेताबी इतनी कि अगर घर में खाना ना खाए तो एक बार कह दीजिए कि मोदी आए हैं चलो देखने चलना है तो झट से खाना खा लेते हैं.... यानि हर मर्ज की दवा मोदी.... इन दोनों के शरारत देखिए....  चुनाव प्रचार के दौरान मधुबनी विधानसभा क्षेत्र के आरजेडी प्रत्याशी समीर कुमार महासेठ के पिता और पूर्व मंत्री राजकुमार महासेठ जब हमारे दरवाजे पर आए तो ये दोनों ही मोदी सरकार जिंदाबाद के नारे लगते दरवाजे पर पहुंच गए.... और हा,  एक जनाब को सरकार नहीं कहने आता तो वो "छलकाल" कहते है.... ये देख महासेठ जी को भी एक बार इन बच्चों के साथ मोदी सरकार जिंदाबाद का नारा लगाना ही पड़ा..... क्योंकि उन्हें मैंने पहले ही बता दिया कि आप अगर गलती से भी लालू या किसी दूसरे नेतओं के नाम ले लेंगे तो ये आप पर हमला भी कर सकते हैं....  इसलिए तो "छोटा आतंक" नाम हैं इनका....  वैसे ये तो सिर्फ बचपना है जो सबको अच्छा लगता है..... चाहे वो महासेठ जी के जैसे विपक्षी दल के नेता ही क्यों ना हो..... लेकिन मोदी जी के जो समर्थक हैं वो धीरे-धीरे अंध भक्त होते जा रहे हैं....  जो लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है.... अगर आपने इन अंध भक्तों के सामने मोदी सरकार के खिलाफ कुछ कहा, तो आप मुस्लिम हैं तो पाकिस्तानी और हिन्दू हैं तो कांग्रेसी बता दिया जाएगा!