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Sunday, 25 October 2015

चुनावी चौराहा

मैं ये चाहता हूँ  कि हर बिहारवासी मतदान करने से पहले 1 KG दाल और प्याज जरूर खरीदे.... उसके बाद ही वोट दे मेरा दावा है कि वोट सही पार्टी को जाएगा.... ये मैं नहीं बल्कि बिहार के एक वोटर का कहना है.... दरअसल इस चुनावी माहौल में जब मैं आपने गांव के आस-पास के वोटरों से चुनावी चौराहा पर चाय पे चर्चा करने पंहुचा तो वहां कई समुदाय के लोग चाय के दुकान पर बैठ कर चुनाव पर चर्चा कर रहे थे.... कुछ देर तो मैं युही सुनता रहा.... लेकिन फिर मैं भी चर्चा में शामिल हुआ.... उसमें से कुछ बीजेपी के समर्थक थे तो कुछ जेडीयू के तो कुछ लालू जी के.... लेकिन चर्चा मोदी सरकार को लेकर चल रही थी..... कुछ बीजेपी समर्थक मोदी का गुणगान कर रहे थे.... तो कुछ मोदी सरकार की खामियाँ निकाल रहे थे.... मैं मन ही मन सोच रहा था कि मोदी जी को अपना सलाहकार इसी चौराहे से उठाना चाहिए.... खैर मैने जब उनसे वोट के लिए पूछा तो पता चला कि यहाँ एनडीए के ज्यादा समर्थक हैं.... लेकिन कुछ समय बाद ही वहां कुछ जेडीयू-आरजेडी के समर्थक पहुंच गए.... अब टक्कर बराबरी का था.... माहौल बिलकुल चैनल वाला बन गया था.... लेकिन यकीन मानिए चर्चा बहुत शालीनता के साथ हुआ.... एक बात जो तमाम लोगों से बात करके समझ में आई वो ये कि बिहार के माहौल में लालू ही सबसे बड़ा मुद्दा है.... लालू का नाम लिये बगैर नीतीश की चर्चा हो ही नहीं रही है.... यानि नीतीश जीते तो भी लालू फैक्टर और हारे तो भी लालू फैक्टर ही होगा.... वही बीजेपी के पास सबसे बड़ा माइनस प्वाइंट ये है कि इनके पास नेताओं की भरमार तो है..... पर मुख्यमंत्री के लायक घोषणा करने वाला कोई चेहरा नहीं है.... जनता जानना चाहती हैं कि अगर सरकार बनेगी तो उनका मुख्यमंत्री कौन होगा ? विरोधी पार्टी के नेता भी यही पूछ रहे हैं कि नीतीश कुमार के सामने कौन होगा ?  आखिर कब तक एक व्यक्ति के नाम पर चुनाव लड़ा जा सकता है.... लोकसभा चुनाव में जीत के बाद मोदी लहर की सवारी कर बीजेपी ने महाराष्ट्र, हरियाणा में सरकार बना ली.... जम्मू कश्मीर में भी मिली जुली सरकार बनाने में पार्टी कामयाब रही..... लेकिन दिल्ली में बीजेपी को बुरी हार का सामना करना पड़ा..... पर बिहार का चुनाव इन चुनावों से अलग है..... विकास का तड़का लगाकर जातियों को तोड़ने की रणनीति बीजेपी कर तो रही है.... लेकिन उससे कितना फायदा मिलेगा ये 8  नवंबर को ही पता चलेगा!

Saturday, 10 October 2015

केजरीवाल के नाम सोनू का खुला खत

नमस्कार,
मैं सोनू कुमार.....एक साधारण सा पत्रकार....अरविंद केजरीवाल जी, आप से निवेदन है कि इतना भी नाटक ना करें कि 'आम आदमी' खुद को 'आम आदमी' कहने में भी शर्म महसूस करें....मुझे पता है कि पीएम ना बन पाने का दर्द आपको अभी तक हैं....पर अब 4 साल तक तो कुछ नहीं हो सकता ये आपको भी पता है और मुझे भी....तो आप अगर इन 4 सालों को दिल्ली के विकास में लगा दें और बिना किसी शोर-शराबे के चुपके से अपना काम करते रहे तो हो सकता है शायद अगले आम चुनाव में आप पीएम भी बन जाए....पर नहीं, आप तो इस नशे में चूर हैं कि दिल्ली की जनता ने आपको 70 में से 67 सीटें दें दी....अगर काम ना भी करें तो भी ऐसे ही मीठी-मीठी बातें कर के अगले चुनाव में 67 नहीं तो 37 सीटें तो मिल ही जाएगी....लेकिन आप गलत सोच रहे हैं....अगर आप एक बार इतिहास देखें तो शायद आपकी आखें खुल जाए....मुझे लगता है अगर ऐसा ही चलता रहा तो हर सीट पर आपको 67 वोट भी मिल जाए तो बड़ी बात है....खैर मुद्दे पर आते है....दादरी कांड पर सभी पार्टियों ने आपने-आपने तरीके से राजनीति की....सबने जहर उगला....पर आपने जो किया उसके लिए आपको सैलूट है....अगर किसी मुद्दे पर बेहतरीन राजनीति करने के लिए ऑस्कर मिलता तो शायद आपको ही मिलता....आपने जो वहां जा कर स्वीट पॉइज़न उगला वो कबीले तारीफ है....आपने महज 2 मिनट के बाइट में करीब 10 से ज्यादा बार हिन्दू-मुस्लिम शब्द का प्रयोग किया....इससे भी आपका मन नहीं भरा तो आपने दिल्ली वालों के पैसे से नेशनल चैनल पर विज्ञापन तक दे डाला....और फिर इसमें भी आपने अपने मीठे आवाज में जमकर हिन्दू-मुस्लिम शब्द का प्रयोग किया....जिसे ये ना भी पता हो कि किसके बीच दंगा हुआ था....आपने उसे अच्छे से समझा दिया....आप बहुत बेहतरीन बोलते है आपके आवाज का तो मैं कायल हो गया हूँ....ना जाने कहा से इतना दर्द लाते हैं....लेकिन माफ़ी चाहता हूँ.....आप कोई ड्रामा कंपनी नहीं चला रहे....आप देश की राजधानी चला रहे हैं....और आपके इस मीठे बातों में जनता सिर्फ एक बार आ सकती हैं, बार-बार नहीं....उन लोगों से तो इसी तरह की राजनीति की उम्मीद है....पर हम आप से ऐसी राजनीति की उम्मीद नहीं करते थे.....सर, अख़लाक़ को जिसने भी मारा है वो ना हिन्दू हो सकता ना ही मुस्लिम.....वो मानवता और लोकतंत्र का हत्यारा हैं....ऐसा आदमी समाज के लिए खतरनाक है.....चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम.....सिर्फ दादरी कांड ही नहीं आपने पिछले एक साल में हर मुद्दे पर बेहद घटिया राजनीति की हैं....फिर वो चाहे गजेंद्र सिंह की खुदकुशी हो या आनंद पर्वत हत्याकांड हो या फिर एलजी नजीब जंग के साथ जंग करने की बात हो....आपने हर मुद्दे पर बेहद मासूमियत से राजनीति की....पर अफ़सोस आपका असली चेहरा जनता पहचान चुकी हैं....और इसका छोटा सा उदाहरण आपको डूसू चुनाव में दिख गया होगा....हालांकि और भी कई मुद्दे है जिसपर आपने और आपकी पार्टी ने बेहद घटिया राजनीति की....अगर सब बताने लगा तो शायद एक किताब में भी ना आए....क्योंकि इन 2 साल के राजनीतिक करियर में आप और आपकी पार्टी ने सिर्फ नाटक ही तो किया हैं....लेकिन अफ़सोस कि आपको छोड़ कर आपके ड्रामे कंपनी में कोई नाटक भी बेहतर नहीं कर पता....अब देखिये ना जिस लोकपाल के लिए आपने इस्तीफा दिया....वहीं लोकपाल आज आपके पूर्ण बहुमत में होने के बाबजूद भी खटाई में है.....आप तो आम आदमी की सरकार बनाने चले थे....शुरुआत में आपके सरे विधायक मेट्रो और रिक्शा से विधानसभा आने का जो नाटक किया....वो मुश्किल से एक महीना भी नहीं चला सका....अब आपके विधायक जो खुदको आम आदमी बताते हैं....उन्हें पुराने सैलरी से गुजर नहीं हो पता तो अब आपने उनकी सैलरी 50-100 फीसदी नहीं पुरे 400  फीसदी बढ़ने की सोच ली....आम आदमी को तो दिन का 400 रुपया भी नसीब नहीं हो पता साहब....गुलाम अली को मुंबई में आने से शिव सेना ने रोका....जो नहीं होना चाहिए.....हर मुद्दे की तरह सबने इसपर भी राजनीति की.....लेकिन आपने तो सबको पीछे छोड़ते हुए एक कदम आगे बढ़ कर राजनीति की....नीतीश कुमार को आपसे सीखना चाहिए.....चुनाव का मौका है अगर बिहार में 2-4 शो गुलाम अली का वो भी करवा लें तो राजनीतिक फ़ायदा भी मिलेगा और वोटर्स एंटरटेन भी हो जाएंगे.....मेरा आपसे यही निवेदन है कि जितना ध्यान आप इस ओछी राजनीति में लगते हैं....अगर उतना ध्यान दिल्ली के विकास पर लगा दें तो शायद आपको पीएम बनने से कोई नहीं रोक सकेगा....दिल्ली 2 साल पहले जहाँ थी, वहीं है.....ऐसा लगता है मनो 2 साल से इसके विकास की गति को किसी की नज़र लग गई हो....मैं ये नहीं कहता कि पहले दिल्ली बहुत विकास कर रही थी....पर कुछ तो कर रही थी ना....अब आप ये मत कहना कि सब मिले हुए हैं जी....ये बीजेपी या कांग्रेस का आदमी लगता है....मैं आपके जानकारी के लिए बता दूँ कि मैंने आपको ही वोट दिया था....जिसका पछतावा मुझे अब हो रहा है....आप अगर इस पछतावे को आने वाले दिनों में ख़ुशी में बदल पाए तो मुझे आप पर गर्व होगा....एक बात याद रखिये जो अच्छा होता है और जो अच्छा काम करता है उसे विज्ञापन देकर किसी को बताना नहीं पड़ता....और फिर दूसरे पार्टियों के विज्ञापन पर तो आप ही सवाल उठाते थे ना....खैर आशा करता हूँ कि ये खत आप तक पहुंचेगा और आप इसे पढ़ कर नकारात्मक नहीं, सकारात्मक लेंगे....और आगे अच्छा काम करेंगे....अगर नहीं करेंगे तो पता ही है ये जो पब्लिक है ये सब जानती हैं....मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं!

आपका वोटर
सोनू कुमार झा