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Friday, 18 September 2015

हां भैया, बिहार में बहार है.....

अभी आप देखें तो लगेगा देश में अगर कहीं बहार है तो सिर्फ बिहार में ही है..... हमेशा यहाँ आपको चुनाव के समय बहार नज़र आ जाएगा.... चाहे वो लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा.....पर इस बार तो हद ही है भैया.... ऐसा लग रहा है मनो बिहार द्रोपती हो और सरे नेता इसके चीर हरण को व्याकुल हो.... जिस नेता या पार्टी का बिहार से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं.... जो कल तक बिहारियों को गली दिया करते थे आज वो भी तमाम चैनलों पर खुद को बिहारियों का रहनुमा बताने को व्याकुल हैं..... देश के पीएम को तो लगता है जैसे बिहार चुनाव जीतना ही उनका एक मात्र लक्ष्य हैं और ये चुनाव जीतते ही वो पीएम पद से इस्तीफा देकर बिहार के सीएम बन जाएंगे.... वैसे मोदी जी बिहार चुनाव इसलिए भी जीतना चाहते हैं..... ताकि नीतीश बाबू को दिखा सकें कि "जो हमसे टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा"! वहीं नीतीश बाबू मोदी जी को अपना 10 का दम दिखाना चाहते हैं..... लेकिन घबराहट में आके एक गलती तो उन्होंने कर ही दी, लालू को साथ लेकर....दरअसल बिहार की जनता नीतीश कुमार को आपने सीएम के रूप में पसंद तो करती हैं....पर लालू के साथ जाने से अब वो एक पसोपेश में है....लालू की छवि बिहार की जनता में जंगलराज की बानी हुई है....और नीतीश कुमार के इसी कमजोर नस को दवा के बीजेपी पार पाना चाहती है....बीजेपी की रणनीति है कि वो लालू के जंगलराज की छवि को जोर-शोर से उठाए....क्योंकि अगर वो नीतीश को ज्यादा तबज्जो देती है तो नीतीश का जो गुड गवर्नेंस रहा है वो हाईलाइट होगा जो बीजेपी कभी नहीं चाहेगी.....खैर अब सुनने में आ रहा है कि हार्दिक पटेल भी वहां रैली करने जा रहे हैं..... हालांकि वो चुनाव तो नहीं लड़ेंगे.... पर ये एक चुनावी रैली से कम भी नहीं होगा..... ऐसा नहीं है कि सिर्फ नेताओं को ही बिहार में बहार नज़र आ रहा हो..... न्यूज़ चैनल वाले भी इसे खूब भुना रहे हैं पिछले कुछ समय से चैनलों पर बिहार छाया हुआ है और यकीन मानिए अभी नवंबर तक बिहार में ये बहार रहने वाला है..... उसके बाद भगवन ही जाने बिहार का क्या होगा? बहरहाल हर बार की तरह इस बार भी बिहार में जाती का मुद्दा हावी है....अब देखना दिलचस्प है कि वहां इस बार किसकी दीवाली होती है....हालांकि जिसकी भी दीवाली हो.....पर दिवाला तो सिर्फ बिहारियों का ही निकलने वाला है.....क्योंकि इस बार दोनों ही कुनबे में 5 साल तक सरकार चलने की कुव्वत नहीं है....चलते-चलते दो लाइने कहना चाहूंगा!
द्रोपदी बना है बिहार सब चीर-हरण को व्याकुल है !
कृष्णा बनकर आ जाओ तुम, बिहारी तुम्हारा गोकुल है !