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Monday, 29 June 2015

'राजे'धर्म नहीं, राजधर्म निभाएं पीएम !





ना खाएंगे, ना खाने देंगे ! जी हां, चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ यही नारा दिया था। लेकिन पिछले कुछ समय से एक के बाद एक बीजेपी की चार महिला नेता अलग-अलग मामलों को लेकर विवादों में हैं। जिसमें सबसे पहला नाम उछला विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का, फिर राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया का, उसके बाद महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पंकजा मुंडे और अब मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी भी इसमें शामिल हो गई हैं। लेकिन पीएम के गले से आवाज़ नहीं निकल पा रही। उनकी दहाड़ अब खामोशी में बदल गई है। लोग तो ये तक कहने लगे है कि पहले मौनमोहनतो थे, ‘मौनमोदीहै, तो दोनों में आखिर फर्क ही किया है। छोटे-छोटे बातों पर ट्वीट करने वाले हाथ अब ट्वीट भी नहीं कर पा रहे हैं। विपक्ष बीजेपी की इन चार देवियों सुषमा स्वराज, स्मृति ईरानी और वसुंधरा राजे और पंकजा मुंडे के खिलाफ सड़क पर उतर आया है और प्रधानमंत्री के पास फिलहाल इस मर्ज़ की दवा दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रही। दरअसल चुनाव के पहले भ्रष्टाचारमुक्त और पारदर्शी प्रशासन देने का वादा करके सत्ता में आई नरेंद्र मोदी सरकार ने जब अपनी सरकार का एक साल पूरा होने पर पर गर्व के साथ दावा किया था कि पिछले एक साल में कोई घोटाला या भ्रष्टाचार का कारनामा नहीं हुआ, तो उनके कार्यकर्ता पूरे देश में खुशी में झूम उठे थे। अन्य मोर्चों पर सरकार की सफलता का भी दावा हर मंच से किया गया था। लेकिन आज यही दावा उनको काटने को दौड़ रहा है। कांग्रेस सरकार का करप्शन तो उसके दूसरे कार्यकाल में सामने आया था, लेकिन बीजेपी सरकार का करप्शन पहले ही साल में सामने आ गया। शायद प्रधानमंत्री मोदी को भी इस बात का पता नहीं होगा कि उनकी सरकार की साफ़ छवि को धूमिल करने कोई दूसरा मोदी आ जाएगा। शुरुआत विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से हुई थी, जो मुश्किल से अपने आप को ललित ग्रहण से बचा पायीं। ललित मोदी का दूसरा शिकार उनकी पारिवारिक मित्र और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे बनी। वसुंधरा पर आईपीएल के पूर्व प्रमुख ललित मोदी के वीजा आवेदन में गुप्त रुप से मदद करने का आरोप लगा है। राजे पर आरोप है कि अगस्त 2011 में उन्होंने मोदी के वीजा संबंधी आवेदन का गवाह बनने पर सहमति जताई थी। साथ ही ब्रिटिश अधिकारियों के सामने उन्होंने ये शर्त भी रखी थी कि भारत में इस बारे में किसी को कुछ पता नहीं चलना चाहिए। लेकिन वसुंधरा के दस्तखत वाला गवाही का दस्तावेज सामने आने के बाद से उनके लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। विरोधियों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी में भी इस मुद्दे पर दो मत है। बीजेपी नेता और सांसद आर के सिंह का भी कहना है कि ललित मोदी भगोड़े हैं और उसकी मदद करना कानून की नज़र में गलत है। लेकिन फिर भी सरकार की अकड़ तो देखिए, इस्तीफे के सवाल पर गृह मंत्री राजनाथ कहते हैं कि मंत्रियों के इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, ये यूपीए नहीं एनडीए गवर्नमेंट है जनाब। इसपर मुझे एक शेर याद आता है।

!! जनाब मत पूछिए हद हमारी गुस्ताखियों की
हम आईना ज़मीं पर रखकर आसमां कुचल दिया करते हैं...!!

राजनाथ सिंह जी ने कुछ इसी अंदाज में कहा। वो राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। ऐसे तो नहीं कि कुछ भी बोल दें, लेकिन बोला तो कुछ ऐसे ही, जो हजम ना हो। दरअसल इतना बवाल मचने के बाद भी बीजेपी इसलिए चुप है। क्योंकि यदि इस मामले में वसुंधरा राजे पर कोई कारवाई की तो राजस्थान में पार्टी संकट में आ जाएगी। राजस्थान बीजेपी में सिर्फ राजे का राज चलता है। ऐसे में अगर वसुंधरा पर कार्रवाई की, तो राजस्थान में बीजेपी टूट सकती है। दूसरी बात कि यदि वसुंधरा पर कार्रवाई हुई तो सुषमा का बचाव करना सरकार के लिए मुश्किल हो जाएगा। वैसे भी वसुंधरा और केन्द्रीय बीजेपी के बीच टकराव कोई नया नहीं है। पहले भी जब एक बार बीजेपी वसुंधरा को विपक्ष के नेता पद से हटाना चाहती थी, तो वसुंधरा ने एक तरह से बगावत कर दी थी और अपने विधायकों को दिल्ली भेज दिया था। खैर उधर, स्मृति ईरानी के खिलाफ शैक्षिक योग्यता के मामले को पटियाला हाउस कोर्ट ने जैसे ही सुनवाई के लायक माना तो कांग्रेस ने फौरन मानव संसाधन विकासमंत्री पद से उनके इस्तीफे की मांग कर दी। ईरानी पर चुनाव आयोग में दाखिल हलफनामों में दो अलग-अलग शैक्षिक योग्यता देने का मामला है। वहीं, दूसरी तरफ महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे का नाम 206 करोड़ रुपए के घोटाले में सामने आया है। कांग्रेस का आरोप है कि नियमों का उल्लंघन कर 206 करोड़ रुपये के सामान की ख़रीद की गई और इसके लिए ऑर्डर एक ही दिन के अंदर दिया गया। ख़रीद का ये ऑर्डर खाने के सामान, किताबों और खाना बनाने के बर्तनों से जुड़ा है। कांग्रेस का आरोप है कि ख़रीद से पहले ख़रीद का आंकलन नहीं किया गया। कहते है वक्त बदलते देर नहीं लगती। अब देखिए ना कभी कांग्रेस के मंत्रीयों के नाम गड़बड़झाले में आते थे और बीजेपी उसे लेकर सड़क से संसद तक हो हल्ला मचाती थी। वक्त बदला, सरकार बदली, अब मोदी के मंत्रीयों के नाम गड़बड़झाले में आ रहे है और कांग्रेस हो हल्ला मचा रही है। दरअसल पांच साल की सरकार में राजनीति ऐसे ही चला करती है। मनमोहन सिंह लाख ईमानदार थे लेकिन बीजेपी और नरेंद्र मोदी ने उनके मंत्रियों, उनकी सरकार के किस्सों पर फोकस बना कर धीमी आंच में बदनामियों को पकाते हुए यूपीए को जनता की निगाहों से उतारा था। आज वहीं काम कांग्रेस कर रही हैं। मोदी चाहे लाख ईमानदार हो लेकिन कीचड़ का छींटे पीएम मोदी पर पड़ना तय है। कांग्रेस अब पीएम को नसीहत दे रही है कि मोदी राजधर्म निभाए, राजे धर्म नहीं। हलांकि नरेंद्र मोदी इन सब बातो से घबराते नहीं है। हमलावर विपक्ष की तो रत्ती भर चिंता नहीं करते। फिर जहां तक राजनीति का सवाल है, तो उसका तकाजा है कि अड़े रहो। अगर एक बार झुके तो फिर झुकते रहना होगा और शायद इसलिए मोदी झुकना नहीं चाहते। हलांकि पीएम के चुप्पी के पिछे एक और कारण हो सकता है और वो है आने वाले दिनों में बिहार विधानसभा चुनाव। बीजेपी को लगता है कि अगर इन मंत्रियों का इस्तीफा लिया गया तो इससे जनता में सीधा संदेश ये पहुंचेगा कि कुछ तो गड़बड़झाला जरूर था और इन सब का असर बिहार के विधानसभा चुनाव पर पड़ना तय है। पार्टी बिहार में विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए फिलहाल कोई गलती नहीं करना चाहती है। हलांकि इन मंत्रियों का इस्तीफा ना हो यह विपक्ष भी चाहेगा और बीजेपी के अंदर भी कुछ मोदी विरोधी यही चाहेगें। वो इसलिए कि इससे मोदी सरकार की आलोचना का चार साला तक उसे मुद्दा मिलेगा। इसका प्रचार करने के लिए राजे-ललित पुराण विपक्ष का मंत्र जाप होगा। ललित मोदी ने जब पहला मंत्र मुहैय्या कराया है तो उसका जाप करते जाना विपक्ष का सहज नुस्खा होगा। विपक्ष का काम इस हल्ला को लोगों की यादाश्त में बनाए रखना है और विपक्ष इसे साल 2019 के चुनाव तक अपने तरकस में रखना चाहेगी। ध्यान रहे भारत में हर घोटाला, हर विवाद, हर गड़बड़झाला राजनीति के तालाब में एक तूफान बनकर आया और सरकार को उड़ा ले गया। बोफोर्स घोटाला हो या कॉमनवेल्थ घोटाला, टू-जी हो, या फिर कोलगेट। इन सारे विवादों ने सरकार को जनता के नजर से उतारने का काम किया। आप माने या ना माने लेकिन ललितगेट कुछ-कुछ बोफोर्स घोटाले के तरह ही है। तब क्वातरोची भगोड़ा बना और भरतीय राजनीति में एक तूफान ले कर आया था, अब ललित मोदी भगोड़े बने हैं और कुछ वैसा ही तूफान ले कर आए है जिसने भारतीय राजनीति में भूचाल ला दिया है और एक साफ-सुथरी सरकार की छवि को धूमिल कर दिया। शायद इसी का नाम राजनीति है। बहरहाल, पार्टी के लिए बुद्धिमता यही होगी कि समय रहते हुए इसका हल ढूंढ़े वरना ये मुद्दे मोदी सरकार के लिए गले की हड्डी बन सकते हैं। क्योंकि पार्टी को दूसरे विदेशमंत्री और मुख्यमंत्री मिल सकते हैं लेकिन जनता का विश्वास एक बार खत्म हुआ तो दोबारा जीतने में फिर बरसों लग जाएंगे। पीएम मन की बात कर रहे हैं ये अच्छी बात है, पर वो उद्दें की बात कब करेंगे ये बड़ा सवाल है। चलते-चलते मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हुं।

कुछ रीत जगत की ऐसी है, हर एक सुबह की शाम हुई !
तू कौन है तेरा नाम है क्या, सीता भी यहाँ बदनाम हुई !

मेरे ‘मन की बात’

रात तकरीबन 2 बजे की बात है.... गहरी नींद में सो रहा था कि तभी मोबाइल पर मैसेज टोन बजती है.... उसके बाद कई ख्याल दिमाग में आने लगे.... शायद मेरी याद में सो नहीं पा रही पूर्व प्रेमिका का ये मैसेज है या ना जाने किसी नई प्रेमिका का.... फिर एक हाथ से आंख मसलते हुए दूंसरे हाथ से मोबाइल उठाताया, तो सामने फेसबुक नोटिफिकेशन होता है.... “Some one इनवाइटेड यू टू प्ले कैंडी क्रश सागा फिर मोबाइल हाथ से छूट जाता है.... और गुस्से में मुठ्ठी बांध बिस्तर पर मार कर अपना गुस्सा निकालता हूं.... और भगवान से कहता हूं कि हे भगवान.... बस एक खून की इजाजत दे दो मुझे और कुछ नहीं चाहिए.... जी हां मुझे लगता है आप में से भी कईयों ने ये झेला होगा.... दरअसल ये गेम के इविटेशन भेजने वाला और फेसबुक वॉल पर अपना फोटो टैग करने वाला आतंक ने परेशान कर रखा है.... कई बार वॉल पर टैग ना करने के लिए प्रार्थना भी की..... लेकिन मान जाए वो आतंक ही क्या.... मुझे लगता है कि अब वो वक्त आ गया है कि गेम इविटेशन और फोटू टैग करने वाले अपराध को गैरजमानती अपराध घोषित कर दिया जाए.... और ऐसों को अंतर्राष्ट्रीय अपराधी मानते हुए उनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटीस जारी किया जाए.... पीएम मोदी जी से निवेदन है कि वो भले ही सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे के मुद्दे पर कुछ ना बोले पर इस मुद्दे को गंभीरता से ले.... और इस बार अपनी मन की बात में ये समस्या जरूर रखें।





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Monday, 22 June 2015

‘योग’पथ पर विश्व


अदभुत, अकल्पनीय, यक़ीनन विश्व रिकॉर्ड टूट गया.... दुनिया के 191 देशों ने विश्व योग दिवस मनाया.... एक दिन में पूरी दुनिया में किसी भी कार्य में इतने लोग नहीं जुटें होंगें.... निश्चित रूप से मैं गर्व की भावना से अभिभूत हूँ.... योग को वैश्विक पहचान दिलाने में कामयाब रहा भारत को आज यकीनन सुखद अनुभूति का अहसास हो रहा होगा....लेकिन क्या यह बिना राजनीति तड़के के नहीं हो सकता था.... जिस दिन यह घोषणा हुई कि 21 जून को विश्व योग दिवस मनाया जाएगा, उसी दिन से इसका श्रेय लेने की होड़ मच गई.... कांग्रेस को लगा मोदी इसका श्रेय ले जाएंगे तो उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की तस्वीर तक दिखा कर यह जताने की कोशिश की कि नेहरू जी के ज़माने से ही कांग्रेस योग करते रही है.... शीर्षासन की मुद्रा वाली तस्वीर दिखा कर चैलेंज तक किया कि यह मुद्रा करके दिखाए मोदी जी.... सूर्य प्रायाणाम को लेकर ऐसा बवाल मचा मनो क़यामत गई हो.... कभी-कभी तो मुझे लागता है कि भारत एक विरोध प्रिय देश है.... और विरोधी होना हमारा राष्ट्रीय चरित्र बन गया हो.... हर किसी बात पे बवाल.... पहले कोई एक काम शुरू करता है दूसरा आकर उसका विरोध शुरू कर देता है.... इतने में कोई तीसरा आकर कहता है कि अगर दूसरे ने पहले का किया काम शुरू नहीं किया तो वो देश से बाहर चले जाए.... उन्हें ये नहीं पता कि रमजान का पवित्र महीना शुरू होने के कारण अधिकांश मुस्लिम पहले से ही पांच वक़्त नमाज अदा करेंगे और योग वाली क्रिया ही दोहराएंगे.... लेकिन अगर यह हो जाता तो फिर योग को इतनी मीडिया हाईलाईट कैसे मिलती.... आखिर राजनीतिक बिरादरी हो या स्वम्भू धर्म के ठेकेदार, इन्होंने अपना काम ही विरोध करना बना लिया है... दरअसल, हमारी आदत है जिस चीज पर रोक लगे हम वही करने को मचल उठते हैं.... गरबा में प्रवेश बंद हो या मंदिर में, अस्पताल के पास हॉर्न बजाना हो या सीढ़ियों पर थूकना मना हो, मना करने पर मान जाएं तो हमारे बदन में ऐंठन होने लगती है.... इस देश में इंसान बिना योग के   तो रह सकता है, पर बिना नियम तोड़े नहीं.... ये हमारी फितरत है.... इसका किसी धर्म से कोई लेना-देना नहीं है.... सरकार चाहे किसी पार्टी की हो एक खामी जरूर होती है. जनता का गला भले दबा ले नब्ज टटोलना नहीं सीख पाती….  सरकार अगर चाहती थी कि हर कोई योग करे तो योग पर रोक लगवा देती..... सरकार को कहना चाहिए था कि गैर हिन्दू सूर्य नमस्कार नही कर सकते.... एक बार ऐसा बोल के तो देखती.... फिर देखते गली-कूचों में लोग योग करेंते नजर आते..... तब जन्तर-मन्तर पर सूर्य नमस्कार करने वहीं गैर हिन्दू समुदाय पहले पांति में खड़े नज़र आते.... क्योंकि ये इंडिया है जनाब !




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