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Thursday, 19 June 2014

बगदादी बगावत




इराक एक बार फिर से दहशत के साये में है में है... एक बार फिर खतरे में है.... इराक ज़ुल्म और जंग की वजह से दुनिया के सबसे चर्चित मुल्कों में शुमार हो चुका है.... वह इराक, जिसके राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने अपने जीते-जी कभी अपनी निगाहें नीची नहीं की.... और तो और उसने दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका से लोहा लेकर तबाह हो जाने से भी गुरेज नहीं किया.... लेकिन अब इसी सद्दाम हुसैन के इराक की जो नई तस्वीर दुनिया के सामने है, उसने अच्छे-अच्छों को चौंका दिया है.... दुनिया के कई देशों को अब इराक की हालत पर तरस आने लगा है..... दरअसल, इस्लामी स्टेट इन इराक एंड द लेवेंट नाम के इस आतंकवादी संगठन ने इराक समेत दूसरे कई देशों को मिलाकर जो नए इस्लामिक मुल्क का सपना बुना है, वो लाखों बेगुनाहों के ख़ून-खराबे से होकर गुज़रता है और इराक के तीन शहरों पर कब्जे के साथ इसकी शुरुआत हो चुकी है.... आलम ये है कि इराक से सैकड़ों मील दूर भारत में भी परेशानी महसूस की जा रही है.... भारत सरकार ने इराक में मौजूद भारतियों को वहां से तुरंत निकलने की हिदायतें दी हैं और वहां के दूतावास को इसके लिए खासतौर पर इंतजाम करने को कहा है... दो रोज पहले आलम ये था कि विद्रोहियों की सेना शहर के बाहर सेना से मुकाबला कर रही थी... लेकिन देखते ही देखते दो दिनों के भीतर सुन्नी विद्रोहियों ने वहां के कई शहरों को अपने कब्जे में कर लिया है.... ऐसे में पूरी दुनिया के सामने अब दो ही रास्ते बचे हैं.... एक ये कि चुपचाप आईएसआईएस को मनमानी करते हुए देखना या फिर आईएसआईएस को रोकने के लिए इराक में ही उनकी घेरेबंदी करना.... और अब तक अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जो संकेत दिए हैं, वो दूसरे विकल्प की तरफ़ ही इशारा करते हैं.... दरअसल, ओबामा ने आईएसआईएस से भिड़ने के विकल्पों पर विचार करने की बात कही है.... और उनकी इस टिप्पणी में इराक के आनेवाले दिनों की तकदीर छुपी है..... लेकिन अमेरिका ने ये भी साफ दिया है कि अमेरिकी सेना को इराक की धरती पर नहीं उतारा जाएगा.... उधर, ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने भी कहा है कि अगर अमेरिका इराक़ में कार्रवाई करता है, तो वह भी मदद करने को आगे आ सकते हैं.... ऐसे में टकराव के हालात से इनकार नहीं किया जा सकता.... दरअसल, आईएसआईएस वो आतंकवादी संगठन है, जो इराक समेत कई मुल्कों में इस्लाम के नाम पर अपना राज कायम करना चाहता है और इसी कोशिश में उसने इराक के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है.... दुनिया के सबसे अमीर आतंकवादी संगठन का सरगना, दुनिया के सबसे खूंखार आतंकवादियों का आका और अलकायदा के चीफ़ अल जवाहरी के बाद ये मोस्ट वांटेड आतंकवादी अबू बकर अल बगदादी इराक में अपने ख़ौफ़ की सलतनत कायम करना चाहता है.... हालत ये है कि इराक़ में मचे इस घमासान की बदौलत जहां 5 लाख लोग अपने ही मुल्क में बेघर होकर शरणार्थी की ज़िंदगी जी रहे हैं, वहीं सैकड़ों लोग अपनी जान से हाथ धो चुके हैं.... इराक में हालत लगातार बद से बदतर हो रहे हैं.... आतंकवादियों ने इराक की राजधानी बगदाद की ओर बढ़ना शुरू कर दिया है.... और दुर्भाग्य से ये वो इलाके हैं, जहां रहनेवाली सबसे बड़ी आबादी से ये आतंकवादी नफ़रत करते हैं.... ऊपर से इन आतंकवादियों के मुकाबले के लिए इराकी फौज ने खुद अपने ही मुल्क में हवाई हमले करने को मजबूर है.... और इन सबमें सबसे ज़्यादा नुकसान आम लोगों का ही हो रहा है.... बहरहाल, अगर इस तरह तेल उत्पादन के ठिकानों पर विद्रोहियों का कब्जा बढ़ता रहा... तो आनेवाने दिनों ने ना सिर्फ़ कच्चे तेल की क़ीमतों में आग लग जाएगी, बल्कि इसकी आंच इराक से दूर दुनिया के तमाम दूसरे देशों तक भी ज़रूर पहुंचेगी।

Friday, 6 June 2014

चाय वाले पीएम


देश के हर नुक्कड़ पर चाय के साथ मोदी सरकार की चर्चा गर्म है... बढ़ती तपिश में भी लोग इसे पसंद कर रहे हैं.... देश की जनता उत्सुकता भरी नजरों से नई सरकार को देख रही है.... दरअसल, नरेद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने, नए रोजगार पैदा करने, इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और बेहतर गवर्नेंस के जो वादे किए थे.... अब इन तमाम वादों पर उनकी परीक्षा शुरु हो चुकी है... हलांकी मोदी से पहले भी सत्ता में आए तमाम नेताओं ने वादे किए है.... लेकिन मोदी को अपने वादे को पूरा करना बड़ी चुनौती है... बिगड़ी व्यवस्था को पटरी पर लाना मोदी टीम के लिए बहुत बड़ी चुनौती है.... अगर भारतीय इकॉनमी की बात करें तो साल 2013 सबसे निराश करने वाला रहा...12 महीने में मंहगाई के एक्सीलेटर पर यूपीए सरकार लगाम लगाने में नाकाम रही.... जीडीपी ग्रोथ को तो संभालने का अवसर ही नहीं मिला.... और 4.5 फीसदी जीडीपी की दर ने ऐसी कमर तोड़ी कि हर कोई दर्द से कराह उठा.... इस लिए इंडस्ट्री, बिजनेसमैन, छोटे व्यापारी, किसानों और आम लोगों की उम्मीद मोदी सरकार पर जा टिकी है.... यानि इस सरकार को सबसे बड़ी और सबसे पहली चुनौती बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाना होगा.... इसके बाद रोजगार का नंबर आएगा.... पिछले कई सालों से देश में ना तो बड़े कारखाने लगे है, ना ही निर्माण की बड़ी परियोजनाएं शुरु हुई है.... ऊपर से जितनी इंडस्ट्री है भी उसका प्रॉडक्शन गिर रहा है.... ऐसे में मोदी सरकार को स्पष्ट करना होगा कि वह रोजगार देने के लिए क्या पहल करने जा रही है.... फिर नंबर है शिक्षा और स्वास्थय का.... देश में शिक्षा और स्वास्थय को लेकर नई सरकार को गंभीरता दिखानी होगी.... खासकर गांवो में ये समस्याएं मूंह वाए खड़ी है.... लोग बुनियादी सुविधाओं से महरुम है.... यह सही है कि हम बुलेट ट्रेन का सपना साकार करें, लेकिन साथ ही यह भी जरुरी है कि बेसिक स्तर पर आ रही समस्याओं को बुलेट की गति से निपटाए.... इन सबके अलावा मोदी टीम को देखना होगा कि पिछले सरकार में जिन योजनाओं पर ब्रेक लग चुका है, अगर उनमें दम है तो बिना किसी भेद भाव के उसे पूरा करना होगा.... यानि मोदी सरकार के सामने खेतो में हरियाली ठहराने से लेकर देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने और दुनिया के साथ अपने संबंध को बेहतर बनाने तक चुनौतियों का अंबार है.... हलांकी अभी मोदी और उनकी टीम पूरी तरह से एक्शन में नहीं आई है.... लेकिन उन्हें समझना होगा कि उनके पास गंवाने के लिए समय नहीं है.... मोदी को देश से जितना प्यार मिला है, उनकी जिम्मेदारी भी उतनी ही बढ़ गई है.... लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है, उनके फैसलों से अलग-अलग काल में देश की दिशा और दशा को बदला है.... यह भी इतिहास के सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो चुका है जब अच्छे दिन की तलाश में जनता ने एक चेहरे पर जीत का सेहरा बांधा है.... एक नई और उम्मीदों से बुनी सरकार की शुरुआत पर हम उन सभी वादों की याद दिलाते हुए यही कहेगें.... मोदी जी अच्छे दिन तो लाएंगे ना.....!




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