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Tuesday, 27 May 2014

रिश्तों का नया अध्याय



देश में धाक जमाने के बाद अब मोदी की नजर दुनिया के उन गिने-चुने कामयाब नेताओं की फेहरिस्त में शामिल होने की है, जिन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता के जरिए दुनिया भर के लिए एक मिसाल कायम की…. फिर चाहे वो पंडित नेहरू का गुटनिरपेक्ष आंदोलन हो, या फिर इंदिरा गांधी का आयरन लेडी का व्यक्तित्व, जब उन्होंने अमेरिका की चुनौति को भी सीधा स्वीकार किया था, मोदी की नजर अब वहां है, जहां से इतिहास में सुनहरे अध्याय लिखने का दायरा शुरू होता है....
दरअसल, मोदी जानते हैं कि देश को अगर विकास के रास्ते पर ले जाना है, तो पड़ोसी मुल्कों के साथ बेहतर रिश्ते जरूरी है.... सीमापार अगर तनाव की बजाय सद्भाव होगा तो सरकार की ऊर्जा सकारात्मक कामों में लगेगी.... मोदी की महत्वाकांक्षा देश की सीमाओं के पार जाने की है.... जिसकी शुरुआत वो सार्क देशों से कर रहे हैं.... कुछ मामलों में मोदी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नक्शे-कदम पर चलते दिख रहे हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते सुधारने के लिए ऐतिहासिक पहल की थी.... फिर चाहे वो लाहौर तक की बसयात्रा रही हो, या फिर आगरा शिखर सम्मेलन, ये और बात है कि ये दोनों कोशिशें पाकिस्तान के भीतर चल रहे आंतरिक उठापटक का शिकार हो गईं... अब
मोदी भी विदेश नीति के मामले में अटलजी के सिद्धांतों पर चलते हुए, अपनी शख्सियत की एक नई लकीर खींचना चाहते हैं.... चुनावों के दौरान मोदी ने सार्वजनिक मंचों से कई बार भारत की विशाल आबादी की दली देते हुए ये सवाल उठाया कि अगर चीन अपने मैनपावर के आधार पर विकसित देशों की कतार में खड़ा हो सकता है, तो भारत क्यों नहीं, मोदी ने कई बार कमजोर विदेश नीति को लेकर भी तंज कसा... अब जब मोदी सत्ता में आए हैं, तो यकीनन उनकी निगाह इन तमाम मसलों पर है.... मोदी भारत को उस दौर में ले जाना चाहते हैं... जब भारत ने शीतयुद्ध के दौर में गुटनिरपेक्ष आंदोलन का नेतृत्व किया था... और दक्षिण एशिया में एक बडे नेता की भूमिका में खड़ा रहा था तो वहीं 1971 में इंदिरा गांधी के वक्त पूर्वी पाकिस्तान को जीतने के बाद भी जियो और जीने दो की नीति पर अलग देश का निर्माण कराकर इंदिरा गांधी ने एक मिसाल दुनिया के सामने पेश की थी.... यकीनन मोदी का एजेंडा दुनिया के सामने देश की प्रतिभा का लोहा मनवाने का है, जिसकी अग्रणी भूमिका में वो खुद आना चाहते हैं... ताकि मोदी का कार्यकाल सदियों के लिए एक नजीर बन जाए.... मोदी की ये शुरुआत इसी का एक हिस्सा है।