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Tuesday, 29 April 2014

मोदी बनाम ऑल...

देश में आज-कल सियासत की दो धाराए बह रही है.... या यू कहे कि जानबूझकर बहाया जा रहा है.... एक धारा साम्प्रदायिकता बनाम धर्मनिरपेक्षता की बहाई जा रही है.... इस कोशिश में कि भावुकता और ध्रुवीकरण के नाम पर माहौल बदल जाएगा, तो दूसरी धारा है विकास के खोखले दावे की.... जिसकी शुरुआत मोदी ने की, तो हालत ये हुई कि ना चाहते हुए भी सबको इस होड़ में खुद को आगे दिखने के लिए जूझना पड़ रहा है..... फिर चाहे माया हो, या मुलायम, नीतीश हों या लालू, या फिर खुद कांग्रेस.... दरअसल, सियासी मौसम का सबसे दिलचस्प मोड़ आ चुका है.... और अभी की जो तस्वीर है वो नरेन्द्र मोदी बनाम ऑल की है, यकीन मानिए इतिहास में जब भी ऐसा हुआ है.... एक करिश्माई राजनीतिक परिवर्तन के दौर से देश गुजरा है.... शायद विरोधी भी इस बात को समझ गए हैं.... लिहाजा अब विकास के मुद्दों को जाति धर्म सम्प्रदाय के नाम पर डायवर्ट करने की कोशिशें भी तेज होने लगी हैं..... हलांकि मोदी को जितना पार्टी के बाहर उतना ही पार्टी के भीतर भी विरोधियों से जूझना पड़ रहा है.... अतीत में ऐसे कई मौके आए हैं जब करिश्मे की तरह सामने आए नेताओं को इन हालात से गुजरना पड़ा है.... नेहरू और इंदिरा गांधी उस दौर में भी कमोबेश ऐसा ही होता था... खासकर इंदिरा गांधी के जमाने में इंदिरा बनाम ऑल का बना माहौल भला कौन भूला है.... यकीनन मौजूदा सियासत के रंग में भी उसी इतिहास का अक्स साफ देखा जा सकता है.... पंडित नेहरू भी संसद के बाहर से लेकर भीतर तक ऐसी परिस्थियों का शिकार रह चुके हैं.... मौजूदा दौर भी मोदी के लिए कमोबेश वैसा ही है, जाहां मोदी पार्टी के भीतर आडवाणी ब्रिगेड का मुकाबला करते हुए... पार्टी के बाहर की चुनौतियों का मुकाबला कर रहे हैं.... मोदी जिस खूबसूरती से राजनीतिक विरोधियों के जाति और सम्प्रदाय के चक्रव्यूह से बचते हुए विकास, गुड गवर्नेस, को मुद्दा बनाकर आक्रामक कैंपैनिंग कर रहे है.... और इसी का नतीजा है कि चुनावी साल के सारे सर्वे मोदी को उनके विरोधियों से काफी आगे बता रहे हैं.... जनता का रिस्पॉंस, सर्वे के परिणाम और सोशल मीडिया की लोकप्रियता का ही नतीजा है कि अब नरेंद्र मोदी, दल और प्रत्याशी से ऊपर उठकर खुद अपने नाम पर वोट मांग रहे हैं.... और विचारधारा, सिद्धांत, जैसे मुद्दों पर चर्चा की बजाय विकास, अकाउंटेबिलिटी, और गुड गवर्वेंस जैसे मुद्दें मोदी के भाषणों की सुर्खियां बनीं हुई है.... दरअसल, मोदी के भाषणों में भ्रष्टाचार और महगाई से त्रस्त जनता को एक उम्मीद सी दिख रही है..... लेकिन मोदी को समझना चाहिए कि उम्मीदों की सवारी शेर की सवारी की तरह खतरनाक होती है..... आप जब उम्मीदों की लहर पर सवार होते है, तो आपको महाबली होने का एहसास होता है... लेकिन आप शेर की पीठ से या उम्मीदों की लहर से उतर नहीं सकते... यह मारक हो सकता है..... ऐसे में अगर वे जनता के उम्मीदों पर खरे उतरते है, तो मुमकिन है कि ये लहर सुनामी में बदल सकती है.... अगर विफल रहे तो उसका खामियाजा आप के साथ-साथ भारतीय राजनीति के लिए भी बुरा साबित हागा....क्योंकि उम्मीद और सपनों की मौत से बुरा कुछ भी नहीं होता।

Friday, 11 April 2014

खास आदमी पार्टी ‘घोषणात्र’

चुनावी समर में गोता लगाने के लिए हमारी पार्टी यानि खास आदमी पार्टी ने भी अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है... हमारे इस घोषणापत्र में खास बात यह है कि हमने ज़्यादातर युवाओं की समस्या को तरजीह दिया है... ताकि ज़यादा से ज़्यादा युवा हमारी पार्टी से जुड़ सके, तो घोषणापत्र इस प्रकार है:-
1-हमारी पार्टी ने महसूस किया है कि आज के युवाओं की असली समस्या रोटी, कपड़ा और मकान नहीं, बल्कि फेसबुक पर उनके कुछ कमीने टाइप दोस्तों द्वारा उनके वॉल पर फोटो टैग किए जाने की है….. लिहाजा हम अगर सत्ता में आए, तो फेसबुक टैगिंग को अपराध की श्रेणी में डाला जाएगा…. और दोषी शख़्स को ताउम्र दूसरों की फोटो में टैग होने और उनपर कमेंट करने की सजा सुनेई जाएगी।
2-हमने देखा है कि हमारे देश के पुरूषों की समस्या टाई बांधने की है.... और देश के 90 फीसदी पुरूष टाई नहीं बांध पाते है.... ख़ास कर वो टीवी एंकर, जो टीवी पर तो हमेशा कोशिश करते रहते है, बुधजिवी बनने की.... लेकिन साच्चाई ये हैं कि वो आपना टाई तक नहीं बांध पाते..... इसलिए हम अगर सत्ता में आए, तो हर छोटे-बड़े शहरों में टाई बांधना सिखाने के लिए स्कूल खोलेंगे.... इससे दो फायदा होगा एक तो पुरूष टाई बांधना सीख जाएंगे.... और दूसरा कि इससे उन लड़कियों को नोकरी मिलेगी, जो टाई बांधना जानती हो।
3-तीसरी बड़ी समस्या मल्टीप्लैक्सों में 10 रूपये के पॉपकार्न को कागज़ की बाल्टी में डालकर 150 रूपया में बेचा जाना है.... इस तरह से ये दुकानदार हमारे देश की भोली जनता को ढग रहें हैं, लिहाजा हम ख़ास अदमी पार्टी इसकी जगह सीधे झालमूड़ी वालों को मल्टीपलैकस में रेहड़ी लगाने की इजाज़त देंगे.... इसके अलावा महंगे पानी के बोटल से बचने के लिए मल्टीपलैक्स के अंदर ही हेडपंप भी लगवाएंगे।
4-युवाओं को जितनी ज़रूरत नौकरी की है, उतनी ही गर्लफ्रैंड की भी है... हम सत्ता में आए तो राइट टू गर्लफ्रैंड कानून लागू करेंगे, जिसके तहत उन तमाम शर्मीले लड़कों को गर्लफ्रैंड बनाने में 50 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा।
5-अब युवाओं के पास ज़्यादा गर्लफैंड होगीं, तो पैसों की भी ज़रूरत पड़ेगी... लिहाजा हम युवाओँ के लिए युवा पेंशन योजना लागू करेंगे जिसके तहत सभी मां-बाप को अपने बेटे-बेटियों को हर महीने गर्लफैंड-ब़यफैंड पर उड़ाने के लिए एक निश्चित रकम दी जाएगी।
6-हमने देखा है कि लड़कियों के लिए गोल गप्पे की बढ़ती महंगाई सबसे बड़ी समस्या है... लिहाजा हम अगर प्रधानमंत्री बने तो सभी गोल गप्पे वाले भइया से एक के साथ एक फ्री गोल गप्पा दिलवाने का भी भरोसा देते हैं।

मुद्दे और भी हैं लेकिन चुनाव आयोग का डर है... जिस कारण हम और वादा नहीं कर सकते, लेकिन सत्ता में आए तो इतना वादा ज़रूर करते है कि किसी युवाओं को कोई समस्या नहीं होने देंगे.... हमारा नारा है, युवाओं का हाथ, खास आदमी के साथ.... सबका साथ, खुदका विकास।