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Thursday, 10 October 2013

'भगवान' का संन्यास

बेजोड़... बेमिसाल... बेहतरीन... लासानी... लाजवाब... यही कुछ विशेषण बचे रह गए हैं, जिनसे इस खिलाड़ी का ज़िक्र किया जाना मुमकिन रह गया है... लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि ये सभी विशेषण के बावजूद भी अन्दर कहीं महसूस होता है कितना भी कह लें तारीफ में, कम ही रहेगा... बार-बार, लगातार ऐसा ही माहौल बनाता जा रहा है यह खिलाड़ी, हम समझ ही नहीं पा रहे, क्या-क्या कहे, और क्या रहने दें... इस खिलाड़ी ने कई बार साबित किया है कि उम्र सिर्फ एक आंकड़ा है, जो आपके जज़्बे और जुनून से बड़ा नहीं हो सकता... फिटनेस, जज़्बा, और जोश उम्र का मोहताज कतई नहीं होता... जिस उम्र से काफी पहले ही बेहतरीन कहे जाने वाले अन्य खिलाड़ी घर बैठ चुके थे, उस उम्र में भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने रहना उपलब्धि नहीं है... इस खिलाड़ी ने हमेशा साबित किया कि इसकी तुलना के लिए इसके अलावा किसी भी और खिलाड़ी को ढूंढना लगभग असंभव है... इस बेमिसाल खिलाड़ी ने हमेशा ऐसे कारनामे किए, जो हमेशा अकल्पनीय लगते रहे... अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक ठोकना ये एक सपने से कम नहीं है... लेकिन ऐसा इसी खिलाड़ी ने वनडे में सबसे पहले किया…. पिछले दो दशकों से ये खिलाड़ी ऐसे मुकाम पर बैठा है, जहां पहुंचना एक सपने से कम नहीं है.... ये खिलाड़ी जहां-जहां खेला, रिकॉर्ड बनते चले गए... दुनिया में सर्वाधिक 463 एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच, और सर्वाधिक 198 टेस्ट मैच खेलने और सर्वाधिक 18,426 एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय रन और सर्वाधिक 15,837 टेस्ट रन इसी खिलाड़ी के नाम हैं... 'क्रिकेट का भगवान' कहे जाने वाले इस खिलाड़ी के मैदान में होते किसी और के नाम कोई भी रिकॉर्ड हमें अच्छा नहीं लगता... वन-डे हो या टेस्ट शायद ही कोई रिकॉर्ड हो, जो इस खिलाड़ी के नाम न हो... हां सबसे तेज़ अर्द्धशतक, सबसे तेज़ शतक, और टेस्ट मैच की एक पारी में 400 रन सिर्फ यही वो आंकड़े हैं, जो इसके नाम के साथ नहीं जुड़े हैं... लेकिन भूलना नहीं चाहिए यह खिलाड़ी अब भी दो मैच खेलेगाआप कहेंगे, इतना कुछ कह दिया, एक बार भी खिलाड़ी का नाम नहीं बताया... यकीन मानिए, मुझे नाम कहने की ज़रूरत महसूस नहीं हो रही है, इस लिए नहीं कहा... आप ही कहिए, इतना कुछ कहने के बाद नाम बताने की ज़रूरत है क्या...?