Follow by Email

Followers

Saturday, 31 August 2013

गांधीजी का सुझाव

कल रात मेरे सपने में महात्मा गांधी आए और मुझसे कहने लगे तुम लोगों ने मुझे कही का नहीं छोड़ा.... रुपये पर मेरा तस्वीर छाप दी है.... और रुपया गिरता जा रहा है.... एक डॉलर में अब 66 रुपया मिल रहा है….  डॉलर पर छपे अमेरिकन नेता जॉर्ज वॉशिंगटन मुझे चिढ़ाते हैं.... वो कहते है, गांधीजी, ये कहा आ गए आप, यू ही साथ साथ चलके..... 1947 में डॉलर और रुपये की हैसियत एक ही थी.... और अब तुम लोगों ने इसका क्या हाल बना दिया है.... मैंने पूछा गांधीजी तो फिर इसका उपय क्या है..... आप ही बता दो क्योंकि हमारी सरकार और आरबीआई की सारी कोशिशें नाकाम सावित हो रही है..... आप ही बताओँ कैसे सुधारे इस गिरते रुपये को..... गांधीजी ने कहा पहले तो नोट पर भले आदमी की फोटो लगाना छोड़ो.... और इस भ्रष्टाचार के जमाने में किसी भ्रष्टाचारी का फोटो लाचार नोट पे लगाओ..... तब जाके रुपये में सुधार होगा.... मैंने पूछा किसका लागाऊ.... उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचारी की भी कमी है तुम्हारे देश में..... ए राजा या कलमाड़ीजी की फोटू नोट पर लागाओ फिर देखना कैसे रुपये की वैल्यू गिरता है.... वो जिस आइटम को हाथ लगा दिया वहीं महंगा हो जाता है.... कॉमनवेल्थ में देखा कैसे सारी चिजों की कीमत सौ-दो सौ गुणा ज्यादा था.... उसी तरह जैसे ही कलमाड़ीजी का फोटू नोट पर लागाओगे समझो फिर 66 डॉलर में एक रुपया मिलने लगेगा।


























Wednesday, 28 August 2013

कब तक रोता रहेगा रुपया?



रुपया लगातार गिर रहा है..... ऐसे में ये सवाल उठना लाजमि है कि आखिर रुपये की ये हालत कैसे हुई.... इसका सबसे बड़ा कारन डॉलर का मजबूत होना है.... 2008 के मंदी के बाद अमेरिका ने खुद को मजबूत करने के लिए बाजार में करीब 2 खरब डॉलर डाले.... ये भारत चीन समेत कई देशों में लगी..... अब अमेरिका बाजार से अपने पैसे खिचने का बात कर रहा है.... जिसके चलते डॉलर का भाव तो बढ़ा है लेकिन भारत, दक्षिण अफ्रीका ब्राजील जैसे देशों की  मुद्रा गिर रही है..... वहीं रुपये की गिरने की दूसरी वजह ये है कि देश का व्यापार घाटा बढ़ गया है..... देश का आयात बढ़ गया है.... जबकि निर्यात घट गया है..... जिसके चलते देश में डॉलर कम आ रहा है..... तिसरी बजह है निवेश का हालत ठिक ना होना..... भारत में निवेश जबतक नहीं बढ़ेगा तबतक रुपये की हालत में सुधार नहीं होगा..... मतलब विदेशी कंपनियां देश में आएगी तो साथ में डॉलर भी लाएंगी.... रिटेल में अभी तक एफडीआई का फाइदा भी नहीं हुआ है..... कुल मिलाकर कहे तो विदेशी कंपनियों को हमारी अर्थव्यवस्था पर भड़ोसा ही नहीं है...... हाल्कि रुपये के गिरने की एक और बड़ी बजह है सरकार ने गरीबों की भलाई के लिए जमकर पैसे बहाये है..... मनरेगा जैसी योजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए है..... लेकिन उसके अनुपात में समाधान के लिए कोई कारगर उपय नहीं किया गया हैं..... अब सबाल उठता है कि रुपये गिरने का हमारे जेब पर उसका असर क्या होगा.... रुपये के गिरने से पेट्रोल डीजल महंगा होगा..... जिससे रोजमर्रा की सारी चीजें मंहगी होगी..... इसके अलावा सारी ब्रांडेड चीज और इलेकट्रोनिक सामान भी महंगा होगा..... इनसब के अलावा भारत की रेटिंग घटेगी..... रेटिंग घटने से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार पर भड़ोसा नहीं करेंगे..... जिससे बाजार में विदेशी निवेश कम होगा..... और तब रुपये का हाल और भी खस्ता होगा..... इन सबके बीच सबाल उढ़ता है कि रुपया सभलेगा कैसे..... रुपया को सभालने के लिए डॉलर का इतजाम करना होगा..... जिसके लिए भारतीये अर्थव्यवस्था को विदेशी निवेशकों के लाइक बनाना होगा..... आयात को कम करना होगा..... सोने के आयात पर लगाम लगानी होगी..... और निर्यात बढ़ानि होगी.... जिसके बाद ही रुपये में सुधार का माहौल बनेगा।