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Thursday, 13 December 2012

हे भगवान....इतना अपमान !



कल मैरा एक दोस्त आया उसने आते ही पूछा....आज-कल अपने भगवान को क्या हो गया हैं....अपने प्रशंसकों की भावनाओं से खेल रहें हैं....अपने देश का नाम खराब कर रहें हैं....मैं चौका और पूछा....भाई ये क्या कह रहें हो अब अलग-अलग देश के लिए अलग-अलग भगवान होने लगे क्या....लेकिन वो नहीं रुका और बोलता ही गया....उसने कहा वो पिछले एक साल में जितने बार शून्य पर आउट हुए हैं....मुझे लगता है वो पूरे करियर में भी नहीं हुए होंगे....अगर अब उनसे नहीं खेला जाता तो सन्यास क्यों नहीं ले लेते....लोगों को कुछ ही दिन दुख होगा न वैसे भी वो पिछले एक साल से जिस तरह से खेल रहें हैं....उससे उनके प्रशंसक और भी ज्यादा दुखी हो रहें हैं....तब मुझे समझ में आया कि ये सचिन की बात कर रहा है....मैंने उससे कहा सचिन को भगवान का दर्जा किसने दिया....तुम लोगों ने ही न....तो अब जब भगवान मानते ही हो तो उनके हर काम को उनकी लीला समझो....अगर वो शून्य पर आउट हो रहें हैं....तो मानो ये भगवान का शून्य लीला हैं....और अगर शतक बना रहें हैं तो शतक लीला....पहले एक बार सचिन का रिकॉर्ड देखलो फिर संयास की मांग करना....उसने कहा भाई मैं रिकॉर्ड देख के ही सन्यास की बात कर रहा हूं....उन्होंने पिछले 10 पारियों में 15.3 की औसत से केवल 153 रन बनाए हैं....जो एक गेंदबाज की औसत से भी खराब है....उन्होंने अपना लास्ट शतक कब लगाया ये भी लोग भूल ही चुके हैं....पिछले 28 पारी से वो शतक के लिए तरस गाए हैं....मैंने फिर कहा उनके करियर का पूरा रिकॉर्ड देखो फिर उनके संयास की बात करों....उसने कहा तभी तो में बता रहा हूं कि एक ऐसा खिलाड़ी जिसने न जाने कितने कीर्तिमान स्थापित किए हैं....देश का नाम उंचा किया हैं....और जिसने एक खिलाड़ी से भगवान का दर्जा हासिल किया हैं....आज उन्हें मैदान में बेवस और लाचार देख कर अच्छा नहीं लगता....जब कोई हमारे भगवान की आलोचना करता है तो सुनके बहुत बुरा लगता...आज-कल हर ऐरे-गैरे सचिन के तकनीक पर सवाल उठाने लगे हैं....हम किसी का मुह नहीं बंद कर सकते....क्योंकि सच्चाई भी यही है कि वो पिछले 2 साल से लगातार खराब खेल रहें हैं....और अगर कुछ दिन ऐसे ही खेलते रहें तो जिस जनता ने उन्हें क्रिकेट का भगवान बनाया हैं....उसी जनता को क्रिकेट का शैतान बनाते भी देर नहीं लगेंगी....मैंने कहा भाई अगर अच्छा नहीं खेलते तो आलोचना तो होगा ही....हमारे देश में जब भगवान श्री राम को भी नहीं छोड़ा जाता....उनकी भी जमकर आलोचना की जाती हैं....तो वो तो फिर भी एक इंसान है....और बिना आलोचना के कोई भी इंसान उस ऊंचाई तक नहीं पहंच सकता जहां आज वो हैं....मुझे उसके बात को सुनकर ऐसा लगा कि वो अपने भगवान के आलोचना को सुनकर उसकी भावना आहत हुई है....अब ये भगवान पर ही छोड़ देना चाहिए कि वो आखिर कब तक अपने प्रशंसकों की भावनाओं को ऐसे ही आहत करते रहेंगे!