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Saturday, 3 June 2017

नीतीश जी ये नैंसी झा की नहीं सुशासन की हत्या है




बिहार के मधुबनी जिले में एक 12 साल की लड़की की निर्मम तरीके से की गई हत्या ने देश को हिला कर रख दिया है, ठीक वैसे ही जैसे सालों पहले निर्भया हत्याकांड ने लोगों को झकझोर कर रख दिया था। निर्भया कांड के बाद इंसाफ की आवाज उठाने के लिए लोग खुद घरों से निकल आएं थे। अपनी आवाज का हथियार लेकर... देश में हर तरफ सड़क से लेकर संसद तक बस एक ही आवाज थी। बदलना होगा, सामज को बदलना होगा, कानून को बदलना होगा, सोच को बदलना होगा। हर बेटी की आवाज थी, हर बहन का दर्द था, हर माँ की टीस थी और हर टीस में मिल रही थी उस जमात की आवाजें जो औरतों की आजाद सांसों की हिमायती थी। देखते ही देखते एक आंदोलन खड़ा हो गया। हर किसी के मन में बस एक ही बात चल रही थी ऐसी दरिंदगी के खिलाफ समाज को जागना होगा। इस हैवानियत से समाज को निकालना होगा। ऐसा दोबारा हो, उसका इंतजाम करना होगा। इस घटना के बाद एक उम्मीद जगी की शायद अब कुछ बदल जाए। शायद अब किसी चलती बस में... ऑटो में... घर में... या राह पर कोई और निर्भया रौंदी जाए। लेकिन हुआ क्या... कुछ भी तो नहीं बदला... सच्चाई यहीं है की निर्भया कांड के पहले भी ऐसे मामले होते रहे और उसके बाद भी हो रहे हैं और इसका जीता जागता उदाहरण है नैंसी झा हत्याकांड। आखिर क्या गलती थी उस मासूम की।
दरअसल 25 मई को लापता नैंसी झा की लाश 28 मई को सुबह उसी गांव के नदी के किनारे एक खेत में मिलती है। नाबालिग लड़की की लाश जिस स्थिति में बरामद हुई वह वाकई ही सभ्य समाज में रहने वाले लोगों के लिए रोंगटे खड़े करने वाला है। लड़की के शरीर पर तेजाब डाले गए थे। लड़की के दोनों हाथों के नसें काट दी गई थी। लड़की की गला को भी बड़ी निर्ममता से रेत दिया गया था। सोशल मीडिया पर इस बच्ची की तस्वीर देखकर रीढ़ की हड्डी में सिहरन होती है। लगता है कलेजे के बीचोंबीच किसी नरभक्षी ने अपने दांत गड़ा दिया हो। ताजुब तब और होती है जब ये पता चलता है कि नैंसी झा को पुलिस चाहती तो बचा सकती थी। क्योंकि जिस दिन नैंसी का अपहरण हुआ था उसी दिन नैंसी के पिता ने एफआईआर दर्ज करवाई थी मगर पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया। यही नहीं इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद भी नीतीश बाबू चुप चाप है। किसी नेता ने वहां जाना भी जरूरी नहीं समझा और ही इसपर आवाज उठाना जरूरी नहीं समझा पक्ष ही विपक्ष ने।
बहरहाल नैंसी की हत्या ने एक बार फिर से बिहार में गिरते नून व्यवस्था का पोल खोल दिया है। बिहार पुलिस पिछले एक-दो सालों से अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने में नाकाम साबित हो रही है। बिहार के मुख्यमंत्री एक तरफ तो लड़कियों के बारे में सरेआम अपनी चिंता जाहिर करते हैं। बिहार में दहेज प्रथा को लेकर नए आंदोलन की बात करते हैं लेकिन वहीं दूसरी तरफ उनकी पुलिस तीन दिन तक एक नाबालिग का मरने का इंतजार करती है।

दरअसल बिहार में पिछले कुछ सालों से युवतियों के साथ रेप और अपहरण की घटना आम हो गई है। सूबे में कानून व्यवस्था पिछले कुछ सालों से बिल्कुल चरमरा सी गई है। रंगदारी, लूट, मर्डर जैसे शब्दो की दहशत बिहारवासियों पर एक बार फिर से छाने लगी है। ऐसे में बिहार में बढ़ रही आपराधिक घटनाओं और सरकार की विफलता पूरे बिहार में धीरे-धीरे उग्र रूप धारण करती जा रही है। इसलिए अब समय गया है कि सीएम नीतीश इसपर जल्द ही कुछ करें और अपने सुशासन को एक बार फिर सावित करें जिसके लिए वो जाने जाते हैं नहीं तो ऐसा हो कि बहुत देर हो जाए।